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शूरा सो पहचानिए जो लड़े दीन के हेत, पुर्जा, पुर्जा कट मरे, कबहुं न छाड़े खेत (बहादुर, शूरवीर वही है, जो धर्म के लिए लड़े, चाहे शरीर का पुर्ज़ा पुर्ज़ा कट जाए, पर जंग का मैदान वह कभी न छोड़े) हमारा धर्म है सचाई, भारतीयता, ईमानदारी, भाईचारा...

Thursday, January 26, 2012

गणतंत्र का आधार हो गुणतंत्र


गणतंत्र दिवस विशेष
 
भारत की आजादी 15 अगस्‍त 1947 के बाद कई बार संशोधन करने के पश्चात भारतीय संविधान को अंतिम रूप दिया गया जो 3 वर्ष बाद यानी 26 नवंबर 1950 को आधिकारिक रूप से अपनाया गया। तब से 26 जनवरी को हम गणतंत्र दिवस मनाते आ रहे हैं। इस बार हम 61वाँ गणतंत्र दिवस मनाएँगे।

भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और इस दौरान लोगों में लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति असंतोष भी व्याप्त होता गया। असंतोष का कारण भ्रष्ट शासन और प्रशासन तथा राजनीति का अपराधिकरण रहा। भारत में बहुत से ऐसे व्यक्ति और संगठन हैं जो भारतीय संविधान के प्रति श्रद्धा नहीं रखते।

व्यर्थ है असंतोष : इस अश्रद्धा का कारण हमारा संविधान नहीं है। माओवादी जैसे पूर्वोत्तर के अन्य संगठन आज भी यदि सक्रिय है तो कारण सिर्फ इतना है कि भ्रष्ट गैर जिम्मेदार राजनीतिज्ञों और अपराधियों के चलते उनका लोकतंत्र से विश्वास उठ गया। लेकिन समझने वाली बात यह है कि लादी गई व्यस्था और तानाशाह कभी दुनिया में ज्यादा समय तक नहीं चल पाया। माना कि लोकतंत्र की कई खामियाँ होती है, लेकिन तानाशाही या धार्मिक कानून की व्यवस्था व्यक्ति स्वतंत्रता का अधिकार छीन लेती है, यह हमने देखा है। जर्मन और अफगानिस्तान में क्या हुआ सभी जानते हैं। सोवियत संघ क्यों बिखर गया यह भी कहने की बात नहीं है। भविष्य में देखेंगे आप चीन को बिखरते हुए।

लोकतंत्र को परिपक्व होने दें : हमें विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश होने का गर्व है। हमारा लोकतंत्र धीरे-धीरे परिपक्व हो रहा है। हम पहले से कहीं ज्यादा समझदार होते जा रहे हैं। धीरे-धीरे हमें लोकतंत्र की अहमियत समझ में आने लगी है। सिर्फ लोकतांत्रिक व्यवस्था में ही व्यक्ति खुलकर जी सकता है। स्वयं के व्यक्तित्व का विकास कर सकता है और अपनी सभी महत्वाकांक्षाएँ पूरी कर सकता है। जो लोग यह सोचते हैं कि इस देश में तानाशाही होना या कट्टर धार्मिक नियम होने चाहिए वे यह नहीं जानते कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में क्या हुआ। वहाँ की जनता अब खुलकर जीने के लिए तरस रही है। ये सिर्फ नाम मात्र के देश हैं।

लोकतंत्र बनेगा गुणतंत्र : हमारा समाज परिवर्तित हो रहा है। मीडिया जाग्रत हो रही है। जनता भी जाग रही है। युवा सोच का विकास हो रहा है। शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है। टेक्नोलॉजी संबंधी लोगों की फौज बढ़ रही है। इस सबके चलते अब देश का राजनीतिज्ञ भी सतर्क हो गया है। ज्यादा समय तक शासन और प्रशासन में भ्रष्टाचार, अपराध और अयोग्यता नहीं चल पाएगी तो हमारे भविष्य का गणतंत्र गुणतंत्र पर आधारित होगा, इसीलिए कहो....गणतंत्र की जय हो।

गणतंत्र दिवस : इतिहास के झरोखे से

भारत के प्रथम राष्‍ट्रपति डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद ने 26 जनवरी 1950 को 21 तोपों की सलामी के साथ भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज को फहराकर 61 वर्ष पहले भारतीय गणतंत्र के जन्‍म की ऐतिहासिक घो‍षणा की थी। अंग्रेजों के शासनकाल से 894 दिन बाद हमारा देश स्‍वतंत्र राज्‍य बना। तब से आज तक हर वर्ष समूचे राष्‍ट्र में गणतंत्र दिवस बड़े गर्व और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। 


लगभग 2 दशक पुरानी इस यात्रा को सन् 1930 में एक सपने के रूप में संकल्पित किया गया और हमारे भारत के शूरवीर क्रांतिकारियों ने सन् 1950 में इसे एक गणतंत्र के रूप में साकार किया। तभी से धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक राष्‍ट्र के रूप में भारत का निर्माण हुआ और एक ऐतिहासिक घटना साकार हुई।

31 दिसंबर 1929 की मध्‍य रात्रि में भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस के लाहौर सत्र के दौरान राष्‍ट्र को स्वतंत्र बनाने की पहल की गई थी। इस सत्र की अध्यक्षता पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी। बैठक में उपस्थित सभी क्रांतिकारियों ने अंग्रेज सरकार के शासन से भार‍त को आजाद करने और पूर्णरूपेण स्‍वतंत्रता को साकार करने के लिए 26 जनवरी 1930 को 'स्‍वतंत्रता दिवस' के रूप में एक ऐतिहासिक पहल बनाने की शपथ ली थी। भारत के उन शूरवीरों ने अपनी लक्ष्य पर खरे उतरने की भरसक कोशिश की और भार‍त सचमुच स्वतंत्र देश बन गया।

उसके बाद भारतीय संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई, जिसमें भारतीय नेताओं और अंग्रेज कैबिनेट मिशन ने भाग लिया। भारत को एक संविधान देने के विषय में कई चर्चाएँ, सिफारिशें और वाद-विवाद हुआ। कई बार संशोधन करने के पश्चात भारतीय संविधान को अंतिम रूप दिया गया जो 3 वर्ष बाद यानी 26 नवंबर 1949 को आधिकारिक रूप से अपनाया गया।
इस अवसर पर डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद ने भारत के प्रथम राष्‍ट्रपति के रूप में शपथ ली। हालाँकि भारत 15 अगस्‍त 1947 को एक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र बन चुका था, लेकिन इस स्‍वतंत्रता की सच्‍ची भावना को प्रकट किया 26 जनवरी 1950 को। इर्विन स्‍टेडियम जाकर राष्‍ट्रीय ध्‍वज फहराया गया और इस तरह गणतंत्र के रूप में भारतीय संविधान प्रभावी हुआ।