आज यह दीवार,

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शूरा सो पहचानिए जो लड़े दीन के हेत, पुर्जा, पुर्जा कट मरे, कबहुं न छाड़े खेत (बहादुर, शूरवीर वही है, जो धर्म के लिए लड़े, चाहे शरीर का पुर्ज़ा पुर्ज़ा कट जाए, पर जंग का मैदान वह कभी न छोड़े) हमारा धर्म है सचाई, भारतीयता, ईमानदारी, भाईचारा...

Monday, September 5, 2011

स्वतंत्रता दिवस


वतन हमारा ऐसे न छोड़ पाए कोई,
रिश्ता हमारा ऐसे न तोड़ पाए कोई,
जान लुटा देंगे, वतन पे हो जायेंगे कुर्बान,
सब मिलकर कहते हैं हमारा देश महान !

कई धर्मों का हमारा देश है,
फिर भी एक दूजे से प्यार है,
कितने लोग, है अलग-अलग भाषाएँ,
फिर भी सबकी एक जुबां है !

हम अपने देश का सम्मान करें,
शहीदों की शहादत याद करें,
सब हाथों पे हाथ रखकर कहें,
जो कुर्बान हुए, उनके लफ़्ज़ों को आगे बढ़ाएं !

मिलकर हम सब यतन करें,
हिन्दुस्तान हमारा खुशहाल रहे,
अपने ध्वज की जो मर्यादा करें,
वही भारत का सच्चा नागरिक कहलाये !

मुश्किल नहीं कोई भी काम,
हम करते है तिरंगे को सलाम,
जब जब ये तिरंगा लहराएगा,
देशभक्ति के किरणों को फैलाएगा !

ये ध्वज हिस्दुस्तान की शान है,
इस देश के बलिदानों की जान है,
ये देश है हमारा, हम इसे बचाए,
आओ गर्व से स्वतंत्रता दिवस मनाये !

Sunday, September 4, 2011

महाभारत क्यों होता?

फ़ौज में कभी-कभी परेड को आदेश मिलता है कि,पीछे मुड और सारी परेड आगे चलते-चलते एकदम से पीछे लौट चलती है.पी.एस.डी.एवं एन.सी.सी.की ट्रेनिंग क़े दौरान हवलदार सा :क़े आदेश पर हम लोगों ने भी ऐसा किया है. आज अपने पुराने कागजात पलटते -पलटते १९६९ -७० क़े दौरान लिखी अपनी यह लघु तुक-बन्दी जिसे २६ .१० १९७१ को हिन्दी टाईप सीखते समय टाईप किया था नज़र आ गई ,प्रस्तुत है-

जो ये भीष्म प्रतिज्ञा न करते देवव्रत , तो यह महाभारत क्यों होता?
 होते न जन्मांध धृतराष्ट्र , तो यह महाभारत क्यों होता?
इन्द्रप्रस्थ क़े राजभवन से होता न तिरस्कार कुरुराज का, तो यह महाभारत क्यों होता?
ध्रूत-भवन में होता न चीर -हरण द्रौपदी का, तो यह महाभारत क्यों होता?
होता न यदि यह महाभारत, तो यह भारत,गारत क्यों होता?
 होता न यदि यह महाभारत, तो यह गीता का उपदेश क्यों होता?
 होता न यदि यह गीता का उपदेश, तो इन वीरों का क्या होता?
 मिलती न यदि वीर गति इन वीरों को, तो इस संसार में हमें गर्व क्यों होता?

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