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शूरा सो पहचानिए जो लड़े दीन के हेत, पुर्जा, पुर्जा कट मरे, कबहुं छाड़े खेत (बहादुर, शूरवीर वही है, जो धर्म के लिए लड़े, चाहे शरीर का पुर्ज़ा पुर्ज़ा कट जाए, पर जंग का मैदान वह कभी छोड़े) हमारा धर्म है सचाई, भारतीयता, ईमानदारी, भाईचारा...

Tuesday, April 10, 2012

शंख के वैज्ञानिक पहलू

शंख बजाने के पीछे धार्मिक कारण तो है साथ ही इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है और शंख बजाने वाले व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है।शंख की उत्पत्ति कैसे हुई? इस संबंध में हमारे धर्म ग्रंथ कहते हैं सृष्टी आत्मा से, आत्मा आकाश से, आकाश वायु से, वायु अग्रि से, आग जल से और जल पृथ्वी से उत्पन्न हुआ है और इन सभी तत्व से मिलकर शंख की उत्पत्ति मानी जाती है। शंख की पवित्रता और महत्व को देखते हुए हमारे यहां सुबह और शाम शंख बजाने की प्रथा शुरू की गई है।

शंख का महत्त्व धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, वैज्ञानिक रूप से भी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि शंख-ध्वनि के प्रभाव में सूर्य की किरणें बाधक होती हैं। अतः प्रातः व सायंकाल में जब सूर्य की किरणें निस्तेज होती हैं, तभी शंख-ध्वनि करने का विधान है। इससे आसपास का वातावरण तता पर्यावरण शुद्ध रहता है। आयुर्वेद के अनुसार शंखोदक भस्म से पेट की बीमारियाँ, पीलिया, कास प्लीहा यकृत, पथरी आदि रोग ठीक होते हैं।

ऋषि श्रृंग की मान्यता है कि छोटे-छोटे बच्चों के शरीर पर छोटे-छोटे शंख बाँधने तथा शंख में जल भरकर अभिमंत्रित करके पिलाने से वाणी-दोष नहीं रहता है। बच्चा स्वस्थ रहता है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि मूक एवं श्वास रोगी हमेशा शंख बजायें तो बोलने की शक्ति पा सकते हैं।

आयुर्वेदाचार्य डॉ.विनोद वर्मा के अनुसार रूक-रूक कर बोलने व हकलाने वाले यदि नित्य शंख-जल का पान करें, तो उन्हें आश्चर्यजनक लाभ मिलेगा। दरअसल मूकता व हकलापन दूर करने के लिए शंख-जल एक महौषधि है।

हृदय रोगी के लिए यह रामबाण औषधि है। दूध का आचमन कर कामधेनु शंख को कान के पास लगाने से `' की ध्वनि का अनुभव किया जा सकता है। यह सभी मनोरथों को पूर्ण करता है।

यजुर्वेद में कहा गया है कि यस्तु शंखध्वनिं कुर्यात्पूजाकाले विशेषतः, वियुक्तः सर्वपापेन विष्णुनां सह मोदते अर्थात पूजा के समय जो व्यक्ति शंख-ध्वनि करता है, उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और वह भगवान विष्णु के साथ आनंद करता है।

1928
में बर्लिन यूनिवर्सिटी ने शंख ध्वनि का अनुसंधान करके यह सिद्ध किया कि इसकी ध्वनि कीटाणुओं को नष्ट करने कि उत्तम औषधि है।
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, पूजा के समय शंख में जल भरकर देवस्थान में रखने और उस जल से पूजन सामग्री धोने और घर के आस-पास छिड़कने से वातावरण शुद्ध रहता है। क्योकि शंख के जल में कीटाणुओं को नष्ट करने की अद्भूत शक्ति होती है। साथ ही शंख में रखा पानी पीना स्वास्थ्य और हमारी हड्डियों, दांतों के लिए बहुत लाभदायक है। शंख में गंधक, फास्फोरस और कैल्शियम जैसे उपयोगी पदार्थ मौजूद होते हैं। इससे इसमें मौजूद जल सुवासित और रोगाणु रहित हो जाता है। इसीलिए शास्त्रों में इसे महाऔषधि माना जाता है।

तानसेन ने अपने आरंभिक दौर में शंख बजाकर ही गायन शक्ति प्राप्त की थी। अथर्ववेद के चतुर्थ अध्याय में शंखमणि सूक्त में शंख की महत्ता वर्णित है।

अथर्ववेद के अनुसार, शंख से राक्षसों का नाश होता है - शंखेन हत्वा रक्षांसि। भागवत पुराण में भी शंख का उल्लेख हुआ है।

यजुर्वेद के अनुसार युद्ध में शत्रुओं का हृदय दहलाने के लिए शंख फूंकने वाला व्यक्ति अपिक्षित है। गोरक्षा संहिता, विश्वामित्र संहिता, पुलस्त्य संहिता आदि ग्रंथों में दक्षिणावर्ती शंख को आयुर्वद्धक और समृद्धि दायक कहा गया है।

Thursday, March 29, 2012

जनरल को शहीद नहीं करेगी सरकार...





रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने सेनाध्यक्ष जनरल वी के सिंह के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई से इंकार के संकेत दिए हैं, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि 


प्रधानमंत्री को लिखे उनके पत्र के लीक होने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसका मतलब है कि सरकार 

जनरल वीके सिंह को बर्खास्त करके या फिर छुट्टी पर भेजकर शहीदों की श्रेणी में नहीं लाना चाहती जिन्हें उनकी ईमानदारी के लिए सेना से बर्खास्त कर 

दिया गया।


रक्षामंत्री ए के एंटनी ने दिल्ली में डिफेन्सएक्सपो में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि खुफिया ब्यूरो से उस पत्र के लीक होने की जांच करने के 

लिए कहा गया है जिसमें सेनाध्यक्ष ने कहा था कि देश की सुरक्षा दांव पर लग सकती है। एंटनी ने कहा कि सरकार इसकी जड़ तक जाएगी और राष्ट्र 

विरोधी कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों का पता लगाएगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या जनरल सिंह पर सरकार को भरोसा है कि इस सवाल पर रक्षा 

मंत्री ने कहा सेना के तीनों अंगो के प्रमुखों पर सरकार को भरोसा है। वे काम कर रहे हैं अन्यथा वे कैसे काम कर रहे होते।


शुरुआत में एंटनी ने सेना प्रमुख से जुड़े सवालों को टालने की कोशिश की और पत्रकारों से सेना को विवाद में नहीं लाने और संस्था को नुकसान नहीं 

पहुंचाने का अनुरोध किया, लेकिन पत्रकारों के बार बार पूछे जाने पर आखिरकार उन्होंने कुछ सवालों के जवाब दिये। यह पूछे जाने पर कि क्या उनको 

लग रहा है कि विश्वासघात हुआ है तो इस पर एंटनी ने कहा कि वह अपनी व्यक्तिगत भावना का खुलासा नहीं करना चाहेंगे और उनका फैसला तथ्यों 

के आधार पर होगा।


उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के प्रति सरकार की रत्ती भर भी बर्दाश्त नहीं करने की नीति है और उसने फैसला किया है कि अगर खरीद प्रक्रिया में किसी 

भी चरण में अनियमितता पायी जाती है तो वह अनुबंध को रद्द करने से नहीं हिचकिचाएगी। उन्होंने कहा कि हम लगातार अपनी रक्षा तैयारियों की 

समीक्षा करते हैं। रक्षा को मजबूत बनाना अनवरत प्रक्रिया है और भारत को रक्षा बलों के आधुनिकीकरण के लिए आवंटन में ठोस वृद्धि करने की 

आवश्यकता है।





पत्र लीक देशद्रोह: जनरल सिंह



रक्षा मंत्री की इस टिप्पणी से कुछ समय पहले जम्मू से जनरल सिंह का बयान आया था कि उनके पत्र के लीक होने को 'बड़े देशद्रोह ' की तरह लिया 




जाय और उसके स्रोत के साथ 'कड़ाई ' से निपटा जाय। एंटनी ने कहा कि कोई देशभक्त भारतीय संवेदनशील पत्र व्यवहार को लीक करने में लिप्त नहीं 



हो सकता क्योंकि इससे केवल दुश्मन को ही फायदा होगा। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट जल्द मिल जाएगी। 


सरकार को फिर पेरशानी में डालने वाले एक घटनाक्रम में आज दिल्ली के एक अखबार में एक रिपोर्ट आई है कि जनरल सिंह ने लेफ्टिनेंट जनरल 

दलबीर सिंह सुहाग के खिलाफ तृणमूल कांगे्रस के एक सांसद की भ्रष्टाचार संबंधी शिकायत को सीबीआई को प्रेषित किया था। सुहाग दीमापुर स्थित 

तीसरी कोर के कमाण्डर हैं और सिंह के बाद सेनाध्यक्ष पद पर प्रोन्नत किए जा सकने वाले संभावितों की कतार में उनका नाम है।